जगत गुरु रामपाल जी महाराज

Jagat Guru Tatvadarshi Sant Rampal Ji Maharaj

 

                       
 
संत रामपाल जी के प्रवचन सुनें रोज शाम 8 बजे “जी जागरण” व “साधना” चैनल पर. अधिक जानकारी के लिए देखें http://www.jagatgururampalji.org

Listen Spiritual Discourses of Saint Rampal Ji on “Zee Jagran” and “sadhna” Channel at 8:00 pm IST everyday. For More Information Please Visit http://www.jagatgururampalji.org

 Our Race is Living being, Mankind is our Religion |
 Hindu, Muslim, Sikh, Christian, there is no separate Religion ||
 
 
 
    सत्य क्या है?

ौन ब्रह्मा का पिता है? कौन विष्णु की माँ? शंकर का दादा कौन है?

शेराँवाली माता (दुर्गा अष्टंगी) का पति कौन है?

हमको जन्म देने व मरने में किस प्रभु का स्वार्थ है?

पूर्ण संत की क्या पहचान है?

हम सभी आत्मायें कहाँ से आई हैं?

ब्रह्मा, विष्णु, महेश किसकी भक्ति करते हैं?

तीर्थ, व्रत, तर्पण एवं श्राद्ध निकालने से कोई लाभ है या नहीं? (गीतानुसार)

समाधी अभ्यास (meditation), राम, हरे कृष्ण, हरि ओम, हंस, तीन व पाँच आदि नामों तथा वाहेगुरु आदि-आदि नामों के जाप से सुख एवं मुक्ति संभव है या नहीं?

श्री कृष्ण जी काल नहीं थे। फिर गीता वाला काल कौन है?

इन  प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए वेबसाइट www.jagatgururampalji.org देखिए. 

 

 

 

 

Know the real god described in all our holy scriptures including vedas, bhagwad gita, purans, shri guru granth sahib, quran sharif, bible, kabir vani etc.. To have indepth knowledge and to see all evidences, please visit www.jagatgururampalji.org and go to holy books/ publications or video satsang section.
 
 

9s टिप्पणियाँ »

  1. Dear Sir,
    Dear Gentlemen,

    Sant Rampal Ji Maharaj is saint. But what is your spiritual root. For Western seekers is essentially.

    If is possible please give massage.

    with sincerence mister Kalin Georgiev
    Shumen, Europe, Bulgaria

    Comment by Kalin Georgiev | जून 30, 2009 | Reply

    • Dear Kalin,

      Sorry for late response.

      Ref. ur query, please visit http://www.jagatgururampalji.org/holybooks.html

      or read the book “message to devotion’s trader” from http://www.jagatgururampalji.org/booksandpublications.html

      This book will answer your queries.

      After reading the book, if u have any questions, plz feel free to Contact us Again.

      Comment by jagatgururampalji | जुलाई 17, 2009 | Reply

    • Shri Kabir Saheb and Nanak Saheb are not contemporary. Kabir saheb is the ony God who was present since trillions of year ago and still remain. Since beginning we are adressing him as a God, Allah or Ram He lives in Human form in Satlok. When you will thoroughly read book Adhaytmin eyan ganga then you will realise the real world around you.

      Comment by yogesh | अगस्त 20, 2009 | Reply

      • योगेश जी,
        अपने विचारों से अवगत कराने के लिए धन्यवाद.
        आदरणीय श्री नानक साहेब जी का आविर्भाव सन् 1469 तथा सतलोक वास सन् 1539 में हुआ था.
        (प्रमाण: पवित्र पुस्तक “जीवनी दस गुरु साहिबान”)
        आदरणीय कबीर साहेब जी धाणक रूप में मृतमण्डल में सन् 1398 में सशरीर प्रकट हुए तथा सशरीर सतलोक गमन सन् 1518 में
        (प्रमाण: कबीर सागर) दोनों महापुरुष 49 वर्ष तक समकालीन रहे थे. हो सकता है कि आपके कहने का आशय दूसरा हो कि कबीर साहेब तो सतलोक में हमेशा से ही विद्यमान थे.. पुस्तक आध्यात्मिक ज्ञान गंगा: http://www.jagatgururampalji.org/agg.pdf के पृष्ठ संख्या 55 से 75 तक इस बारे में पूरे विस्तार से बताया गया है.

        स्वयं श्री गुरु नानक साहेब जी श्री गुरु ग्रन्थ साहेब जी में महला 1 की अमृतवाणी में स्वयं स्वीकार करते हैं कि मुझे गुरु जी जिंदा रूप में आकार में मिले। वही धाणक(जुलाहा) रूप में सत् कबीर (हक्का कबीर) नाम से पृथ्वी पर भी थे तथा ऊपर अपने सच्चखण्ड में भी वही विराजमान है जिन्होंने मुझे अमृत नाम प्रदान किया।

        इसी का प्रमाण गुरु ग्रन्थ साहिब के राग ‘‘सिरी‘‘ महला 1 पृष्ठ नं. 24 पर शब्द नं. 29

        शब्द – एक सुआन दुई सुआनी नाल, भलके भौंकही सदा बिआल
        कुड़ छुरा मुठा मुरदार, धाणक रूप रहा करतार।।1।।
        मै पति की पंदि न करनी की कार। उह बिगड़ै रूप रहा बिकराल।।
        तेरा एक नाम तारे संसार, मैं ऐहो आस एहो आधार।
        मुख निंदा आखा दिन रात, पर घर जोही नीच मनाति।।
        काम क्रोध तन वसह चंडाल, धाणक रूप रहा करतार।।2।।
        फाही सुरत मलूकी वेस, उह ठगवाड़ा ठगी देस।।
        खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतार।।3।।
        मैं कीता न जाता हरामखोर, उह किआ मुह देसा दुष्ट चोर।
        नानक नीच कह बिचार, धाणक रूप रहा करतार।।4।।

        दूसरा प्रमाण:- नीचे प्रमाण है जिसमें कबीर परमेश्वर का नाम स्पष्ट लिखा है, श्री गु.ग्र पृष्ठ नं. 721 राग तिलंग महला पहला में है:

        यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कुन करतार।
        हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार।।
        दूनियाँ मुकामे फानी तहकीक दिलदानी।
        मम सर मुई अजराईल गिरफ्त दिल हेच न दानी।।
        जन पिसर पदर बिरादराँ कस नेस्त दस्तं गीर।
        आखिर बयफ्तम कस नदारद चूँ शब्द तकबीर।।
        शबरोज गशतम दरहवा करदेम बदी ख्याल।
        गाहे न नेकी कार करदम मम ई चिनी अहवाल।।
        बदबख्त हम चु बखील गाफिल बेनजर बेबाक।
        नानक बुगोयद जनु तुरा तेरे चाकरा पाखाक।।

        पुस्तक आध्यात्मिक ज्ञान गंगा: http://www.jagatgururampalji.org/agg.pdf के पृष्ठ संख्या 55 से 75 तक इस बारे में पूरे विस्तार से बताया गया है.

        Comment by jagatgururampalji | अगस्त 22, 2009

      • SatSaheb,

        Sorry for the confusion I have created and thanks for correcting me.

        I agree with you that Satguru Satkabir saheb and Nanak ji are contemporary. But in a sense real age, I mean that Satkabir saheb is the only god and noone is contemporary if we talk about the actual age.We can say that when Nanakji has taken birth during that time Kabir saheb also has taken Avtaar.

        Satsaheb

        Comment by yogesh | अगस्त 25, 2009

  2. respected sir, i have read the book, Bhakti Saudagar ko sandesh, and i have read to Sh.Guru Nanak dev ji maharaj as well. Sh. Kabir Saheb and Sh. Guru Nanak dev ji maharaj were contemporary. Please tell us when they met each other and what they said to each other.

    Comment by sunil kumar | अगस्त 14, 2009 | Reply

  3. Satsaheb,

    Surati Nirti ka kisko kehtein hein.

    Thanks,
    Yogesh

    Comment by yogesh | सितम्बर 14, 2009 | Reply

  4. sat saheb

    Comment by vinod khanagwal | सितम्बर 18, 2009 | Reply


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